कहानी का सारांश | Maa kahani ka saransh
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| मां कहानी का सारांश | Ma kahani ka saransh |
दोस्तों इस पेज में आपको क्लास 10th हिंदी वर्णिका भाग- 2 के पाठ -4 मां कहानी का सारांश एवम लेखक परिचय दिया हुआ है। जो बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2023 ( Bihar board Matric exam 2023 ) के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। और साथ में आपको मां कहानी का ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव क्वेश्चन भी इस वेबसाइट पर मिल जाएगा। जिससे आप अपने बोर्ड परीक्षा की तैयारी अच्छे ढंग से कर सकते हैं।
1. 'मां' कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर:- "माँ" कहानी पाठ के लेखक ईश्वर पेटलिकर जी है।इस कहानी में उन्होंने माँ की ममता का सजीवात्मक चित्रण किया है।जन्म से पागल और गूंगी बेटी को जिस तरह पाल-पोस रही है वह अकथनीय है।अपनी सारी खुशियां उन्हें अपनी बेटी की खुशि में ही दिखती है।मंगु के अलावा बेटा-बेटी,पोता-पोती होते हुए भी वह पूरी तरह मंगु पर ही समर्पित है।यह देख इनकी बहुए गुस्सा भी करती थी तथा मंगु को अस्पताल में भर्ती करने को बोलती थी पर उसकी माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती करवाने से डरती थी ,क्योंकि उन्हें डर होता था कि अस्पताल के कर्मचारी इसकी सही से देख भाल नही कर सकते है और मंगु की माँ अस्पताल को गौशाला का दर्जा भी देती थी।परंतु कुसुम की तबियत ठीक होने और गाँव के लोगो की बातों को सुन कर मां जी अपनी बेटी को भी अस्पतला में भर्ती करवाने के लिए मान जाती हैं। और मंगू को अस्पताल में भर्ती करा देती है।
2. माँ कहानी के कहानीकार 'ईश्वर पेटलीकर' का परिचय दें-
उत्तर: ईश्वर पेटलीकर गुजराती के लोकप्रिय कथाकार हैं। इनके कथा साहित्य में गुजरात का समय और समाज, नये-पुराने मूल्य, दर्शन और कला आदि रच-पककर नई आस्वादकता के साथ उपस्थित होती है। 'खुन ही सगाई' इनकी प्रसिद्ध कहानी है और 'काला पानी' इनका लोकप्रिय उपन्यास है। साहित्य के अलावा श्री पेटलीकर सामाजिक - राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय रहे हैं। इनकी दर्जनों पुस्तकें पुरस्कृत मे भी सक्रिय रहे है। इनकी दर्जनो पुस्तकें पुरस्कृत और बहुप्रशंसित हो चुकी है। यह कहानी गोपालदास नागर द्वारा संपादित एवं अनूदित कहानी संग्रह और 'मां' से साभार संकलित है।
